क्या Suzlon Energy बनेगा रॉकेट? एक्सपर्ट बोले, ₹120 तक जा सकता है शेयर…..

Suzlon Energy का शेयर मार्च 2026 में करीब 40–41 रुपये के दायरे में ट्रेड कर रहा है और पिछले एक साल में इसने रिटेल निवेशकों के लिए शानदार रिटर्न बनाया है। जो स्टॉक कभी लगभग 4 रुपये तक गिर गया था, वही अब 10 गुना से ज्यादा ऊपर आकर मल्टीबैगर साबित हुआ है। कम प्राइस टू अर्निंग (P/E) रेशियो लगभग 17 और इंडस्ट्री P/E करीब 42 होने से वैल्यूएशन अभी भी बहुत महंगा नहीं दिखता।

एक्सपर्ट का 120 रुपये तक का टारगेट

CNBC Awaaz पर टेक्निकल एनालिस्ट प्रकाश गाबा ने कहा है कि शॉर्ट टर्म में Suzlon Energy के शेयर में उतार–चढ़ाव रहेगा, लेकिन लॉन्ग टर्म में यह स्टॉक 110–120 रुपये तक जा सकता है। उनके मुताबिक 30–40 रुपये के जोन में मजबूत सपोर्ट है और अगर यह स्टॉक 80 रुपये का स्तर decisively पार कर लेता है तो अगला बड़ा तेजी वाला फेज शुरू हो सकता है। जिन निवेशकों ने 4 रुपये के आसपास खरीदा था, उनके लिए एक्सपर्ट की राय है कि घबराने की बजाय होल्ड करना ज्यादा बेहतर रणनीति हो सकती है।

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Suzlon Energy के नतीजे, ऑर्डर बुक

Suzlon Energy ने Q3 FY26 में मजबूत नतीजे दिखाए हैं, जहां रेवेन्यू में लगभग 42 प्रतिशत की वृद्धि और EBITDA में करीब 48 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई है। नौ महीने FY26 में कंपनी का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू लगभग 11,200 करोड़ रुपये और EBITDA करीब 2,060 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, जबकि प्रॉफिट में 50 प्रतिशत से ज्यादा की ग्रोथ देखी गई है। कंपनी लगभग डेब्ट–फ्री है, नेट कैश पोजीशन करीब 1,500 करोड़ रुपये, ROE लगभग 40–41 प्रतिशत और ROCE लगभग 32–33 प्रतिशत के स्तर पर है, जो ऑपरेटिंग स्ट्रेंथ दिखाता है।

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रिन्यूएबल एनर्जी थीम और ग्रोथ का मौका

Suzlon Energy का पूरा बिजनेस विंड एनर्जी जैसे रिन्यूएबल सेगमेंट पर केंद्रित है, जहां भारत में डिमांड लगातार बढ़ रही है। कंपनी मैनेजमेंट के अनुसार देश की वार्षिक विंड इंस्टॉलेशन अगले दो साल में 10 GW और 2030 तक 13–15 GW प्रति वर्ष तक पहुंच सकती है, जबकि अभी इंस्टॉल्ड विंड कैपेसिटी लगभग 54 GW है। सुजलॉन के पास लगभग 6.4 GW की रिकॉर्ड ऑर्डर बुक, 20 GW सालाना मैन्युफैक्चरिंग क्षमता और 15.2 GW से ज्यादा इंस्टॉल्ड बेस के साथ यह भारत की प्रमुख रिन्यूएबल एनर्जी सॉल्यूशन कंपनी मानी जाती है।

रिस्क, वोलैटिलिटी और अहम लेवल

Suzlon Energy के शेयर में शॉर्ट टर्म में वोलैटिलिटी बनी रह सकती है, क्योंकि टेक्निकल चार्ट पर 30–40 रुपये का सपोर्ट जोन और ऊपर की तरफ 80 रुपये का मेजर रेसिस्टेंस दिख रहा है। तिमाही नतीजों में टैक्स एडजस्टमेंट की वजह से प्रॉफिट में उतार–चढ़ाव, डिब्टर डेज 100 से बढ़कर लगभग 130 दिन और लो प्रमोटर होल्डिंग जैसे फैक्टर रिस्क के तौर पर बने हुए हैं। फिर भी, लगभग 0.05 के डेब्ट–इक्विटी रेशियो, मजबूत ऑर्डर बुक और सेक्टर की पॉजिटिव डिमांड सुजलॉन को लॉन्ग टर्म थीमेटिक स्टॉक की कैटेगरी में रखती है, जिस पर मार्केट की करीबी नजर बनी हुई है।

Disclaimer : इस लेख में दी गई जानकारी केवल शैक्षिक और जनरल इनफॉर्मेशन के उद्देश्य से तैयार की गई है, इसे किसी भी तरह की निवेश या ट्रेडिंग सलाह नहीं माना जाए।