Vedanta का ₹3000 करोड़ सिक्रेट प्लान! शेयर पर सीधा असर, निवेशकों को होगी कमाई

Vedanta का ₹3,000 करोड़ बॉन्ड प्लान कंपनी के कर्ज प्रबंधन और लिक्विडिटी मजबूत करने की बड़ी चाल है, जिसका सीधा असर शेयर सेंटिमेंट और वैल्यूएशन पर पड़ सकता है।

Vedanta का नया ₹3,000 करोड़ बॉन्ड इश्यू क्या है?

Vedanta Ltd घरेलू मार्केट में लगभग ₹3,000 करोड़ के नॉन-कनवर्टिबल डिबेंचर (NCD) जारी करने जा रही है। यह बॉन्ड इश्यू प्राइवेट प्लेसमेंट के जरिए होगा और कंपनी बोर्ड ने 3 लाख NCD तक जारी करने की मंजूरी दी है, जिनका फेस वैल्यू ₹1,00,000 प्रति डिबेंचर रखा गया है।

तीन साल की अवधि वाले बॉन्ड पर करीब 8.75% के आसपास और पांच साल वाले बॉन्ड पर लगभग 9% तक कूपन रेट ऑफर किया जा सकता है, जो मौजूदा रेट्स के हिसाब से इन्वेस्टर्स के लिए आकर्षक यील्ड है। इन NCDs को बीएसई पर लिस्ट करने की योजना है, जिससे सेकेंडरी मार्केट में भी इनका ट्रेडिंग संभव होगा।

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पैसा कहां जाएगा: कर्ज घटाने का मास्टर प्लान

यह पूरा फंडरेजिंग प्लान मौजूदा हाई कॉस्ट कर्ज को रीफाइनेंस करने और आने वाली मैच्योरिटी को आराम से चुकाने के लिए तैयार किया गया है। पिछले दो साल में Vedanta ग्रुप ने लगातार रीफाइनेंसिंग, एसेट मोनेटाइजेशन और बॉन्ड इश्यू की मदद से ग्रुप लेवल पर ग्रॉस डेब्ट लगभग 9.1 अरब डॉलर से घटाकर करीब 4.7 अरब डॉलर तक लाया है।

Vedanta Ltd लेवल पर 31 मार्च 2025 तक कंपनी का टोटल कंसोलिडेटेड डेट लगभग ₹73,850 करोड़ और नेट डेट करीब ₹53,251 करोड़ था, जबकि कैश और कैश इक्विवेलेंट्स ₹20,602 करोड़ के आसपास थे। नेट डेट टू EBITDA रेशियो भी लगभग 1.5x से सुधरकर करीब 1.2x के पास आ गया है, जो बैलेंस शीट स्ट्रेंथ के लिहाज से पॉजिटिव संकेत माना जाता है।

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डिमर्जर, रेटिंग और लिक्विडिटी पर असर

कंपनी पहले से ही अपने एल्युमिनियम, ऑयल एंड गैस, पावर और आयरन-स्टील बिजनेस को अलग-अलग लिस्टेड एंटिटीज में डिमर्ज करने की प्रक्रिया में है, जिसे चालू वित्त वर्ष के अंत तक पूरा कर Q1 FY27 तक लिस्टिंग का लक्ष्य है। डिमर्जर के बाद हर बिजनेस की वैल्यू अलग से अनलॉक होने की संभावना रहती है, इसलिए इस बीच कर्ज पर कंट्रोल और लिक्विडिटी मजबूत रखना कंपनी के लिए जरूरी है।

ICRA और CRISIL ने Vedanta Ltd को AA रेटिंग पर रखा है और इसे वॉच विद डिवेलपिंग इम्प्लिकेशंस के साथ मॉनिटर कर रहे हैं, यानी कर्ज घटने, कैश फ्लो और कमोडिटी प्राइस के हिसाब से रेटिंग अपग्रेड या डाउनग्रेड की गुंजाइश बनी रहती है। बॉन्ड इश्यू से मिलने वाला फंड ब्याज लागत को ऑप्टिमाइज करने, मैच्योरिटी प्रोफाइल लंबी करने और शेयर पर कर्ज से जुड़ी चिंता को कुछ हद तक कम करने में मदद कर सकता है, जिससे मीडियम टर्म में निवेशकों की कमाई की संभावनाएं बढ़ सकती हैं

Disclaimer : इस लेख में दी गई जानकारी केवल शैक्षिक और जनरल इनफॉर्मेशन के उद्देश्य से तैयार की गई है, इसे किसी भी तरह की निवेश या ट्रेडिंग सलाह नहीं माना जाए।